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मुबंई! इन्दौर महावीर भवन में प्रवचन करते हुए विशाल जनभेदिनी के मध्य श्रमण संघीय सलाहकार डा•राम मुनि निर्भय ने कहा -मानव जीवन की सार्थकता भगवान का गुणगान व स्मरण करने से होती है ।संसार में मानव नेताओं का या किसी विशिष्ट व्यक्ति का गुणगान है तो उसमें उसका सवार्थ हो सकता है अथवा उसे चापलूसी भी कहा जा सकता है परन्तु भगवान का गुणगान करते समय निस्वार्थ भावना होनी चाहिए ।
भगवान किसी से खुश या नाराज नहीं होते यह तो व्यक्ति की श्रद्धा,भक्ति की परीक्षा होती है ।भगवान को जितनी अधिक श्रद्धा भक्ति होगी उतना ही फल मानव को प्राप्त होता है भगवान का करतें समय तल्लीनता होनी चाहिए ।यह तल्लीनता ही भक्ति कहलाती हैं, ऐसी शुद्ध भक्ति के वश ही भगवान होते हैं ।चंदनबाला की शुद्ध भक्ति के वश भगवान महावीर वापिस आए तथा चंदनबाला के हाथ से दान ग्रहण किया ।
द्रोपदी भी कृष्ण के प्रति तल्लीनता व श्रद्धा भक्ति होने से उनका चीर बढ गया था ।सच्ची भक्ति से असंभव कार्य भी संभव होते हैं ।प्रवचन में दक्षिणजयोति पू•श्री डा•आदर्श ज्योति जी म-सा आदि ठाणा 4विराजमान थे ।
यह जानकारी शंकर लाल राठोड ने दिया

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