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हमारे गाँव

 *हमारे गाँव*
विधा : गीत


गाँवों की संस्कृति का,
कहना है क्या यारों।
लोगों के दिलों में, 
बसता है जहां प्यार।
इंसानियत वहां पर,
जिंदा है अभी यारों।
कैसे भूल जाएं,
अपनी संस्कृति को।


मिल बैठकर बाटते हैं,
गम एक दूसरे के।
जब भी कोई विपत्ति,
आती है सामने से।
सब मिलकर उसका, 
हल निकालते हैं।
ऐसे हमारे मुल्क के,
गाँव वाले ही होते हैं।।


इतिहास को उठाकर,
देखो जरा लोगों।
गाँवों से ही निकले हैं,
वीर महान योध्दा।
अभी हाल में कितने,
खिलाड़ी निकल रहे हैं।
अपने देश का वो,
नाम रोशन कर रहे हैं।
गाँवों की संस्कृति का,
आज भी जवाब नहीं हैं।।


तभी तो कहते है कि
मेरा भारत महान।।


जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

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