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हनुमन्तनगर को पावन बनाने पहुंचे तेरापंथ अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण,श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य का किया भव्य स्वागत

हनुमन्तनगर को पावन बनाने पहुंचे तेरापंथ अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण

श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य का किया भव्य स्वागत

प्रवासी एकता/रवि जैन

बेंगलुरु (कर्नाटक): भक्तों की भावनाओं को पूर्ण करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य, शांतिदूत अखण्ड परिव्राजक महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगलवार को हनुमंतनगर को बनाने पहुंचे तो ऐसा लगा मानों पूरा हनुमंतनगर अपने आराध्य के चरणों इस प्रकार बिछ गया जैसे भक्त हनुमान श्रीराम के चरणों में बिछ छाया करते थे। वर्षों पूर्व संजोया हुआ सपना पूर्ण हुआ तो मानों भावनाओं के ज्वार उठने लगे। कंठ अवरुद्ध और शब्द मूक हो गए। ऐसे में उस ज्वार को अभिव्यक्त करते सजल नयन संपूर्ण समर्पण के भाव को दर्शा रहे थे। श्रद्धा से जुड़े हाथ, मन में आस्था की उठती तरंगे कई श्रद्धालुओं के चेहरे को अश्रुओं की धारा से भर रहे थे। हनुमंतनगरवासियों ने अपने आराध्य का भव्य स्वागत किया। आचार्यश्री हनुमंतनगर स्थित बेंगलुरु चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मूलचंद नाहर परिवार के निवास स्थान में पधारे।

प्रवास स्थल से कुछ दूरी पर स्थित डाॅनखला मैदान में आज का मुख्य प्रवचन कार्यक्रम समायोजित था। आचार्यश्री के प्रवचन पंडाल में पधारते ही पूरा प्रवचन पंडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा। सर्वप्रथम हनुमंतनगरवासियों को श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा ग्रहण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। आचार्यश्री ने समुपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि इस संसार में कोई भी पदार्थ स्थायी नहीं होता। जो उत्पन्न होता है, एक दिन नष्ट हो जाता है। इसी प्रकार आदमी का शरीर भी विनाशधर्मा है। इसमें रहने वाली आत्मा स्थाई होती है। आत्मा आगे जाने वाली होती है और वह चिरस्थाई भी होती है। इसलिए आदमी को अपनी आत्मा के कल्याण का प्रयास करना चाहिए। शरीर, वैभव, धन, संपदा सभी अधु्रव हैं। आदमी को धर्म का संचय करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपनी आत्मा के हित के लिए धर्म का टिफिन तैयार रखने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने हनुमंतनगर आगमन के विषय में कहा कि यहां के श्रद्धालुओं का आचरण सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की भावना से युक्त तो जीवन सुखमय हो सकता है।

चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-बेंगलुरु के अध्यक्ष मूलचंद नाहर, एच.बी.एस.टी. सभा के अध्यक्ष सुभाष बोहरा, मंत्री हरकचंद ओस्तवाल, तेयुप अध्यक्ष गौतम खाब्या, शशिकला नाहर, पूर्व अभातेयुप अध्यक्ष अविनाश नाहर, पूर्व विधायक केशाराम चैधरी ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी आस्थासिक्त भावनाओं के सुमन समर्पित किए। कार्यक्रम के मध्य श्री पेजावर मठ के वयोवृद्ध संत श्री श्री विश्वेश्वरतीर्थ स्वामी जी पूज्य सन्निधि में पधारे तो दोनों संतों के आध्यात्मिक मिलन को देख जनता आह्लादित हो उठी। कुछ ही समय बाद आॅल इंडिया एंटी टेरिरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष श्री मनिन्दरसिंह बिट्टा भी पूज्य सन्निधि में उपस्थित हुए। आचार्यश्री से आशीष प्राप्त कर बिट्टा ने कहा कि सर्दी, गर्मी, बरसात आदि मौसम की प्रतिकूलता से बिना घबराए आचार्यश्री जैसे महासंत लोगों के कल्याण को निरंतर गतिमान हैं। इस समय पूरा विश्व दो समस्याओं से ग्रसित है एक तो आतंकवाद जो हमारे सैनिकों की जान ले रहे हैं और दूसरी समस्या है युवाओं में बढ़ता नशे का चलन। आचार्यश्री की प्रेरणा से लाखों लोग नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार कर चुके हैं। आचार्यश्री की अकेले जिम्मेदारी नहीं है, उनके बताए रास्ते पर चलना हमारी भी जिम्मेदारी बनती है, तभी इससे मुक्त हुआ जा सकता है। आचार्यश्री का यह प्रयास अवश्य ही भारत की तस्वीर बदलने वाला है। बशर्ते हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आचार्यश्री के बताए रास्ते पर चलना चाहिए।

इस अवसर पर श्रीश्री विश्वेश्वरतीर्थ स्वामीजी ने कहा कि आचार्यश्री महाश्रमणजी का कर्नाटक की धरती पर पदार्पण यहां के लोगों के कल्याण के लिए हुआ है। अहिंसा, सद्भावना व व्यसनमुक्ति की दिशा में आगे बढ़ें। आचार्यश्री महाश्रमणजी के विचार सर्वोत्तम है। इतना श्रम कर देश के लोगों जगाने का प्रयास कर रहे हैं। तेरापंथ महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। स्थानीय तेरापंथ युवक परिषद व तेरापंथी सभा के सदस्यों ने संयुक्त रूप से गीत का संगान किया। नाहर परिवार की महिलाओं द्वारा गीत का प्रस्तुति दी गई। गीत के दौरान आचार्यश्री के हनुमान रूप में धारण किए अनेक बालक उपस्थित हुए और अपने भाव प्रस्तुति के माध्यम से अपने आराध्य का श्रीराम के रूप में अभ्यर्थना की। किशोर मण्डल ने अपनी प्रस्तुति दी और आचार्यश्री से कुछ संकल्प दिलाने की प्रार्थना की तो आचार्यश्री ने उन्हें आचार्यश्री ने गुस्सा न करने का संकल्प कराया साथ ही कहा कि जिस दिन गुस्सा आ जाए, उस दिन अन्न के त्याग का प्रयास करना चाहिए। किशोरों ने आचार्यश्री के प्रति अपनी प्रणति अर्पित की। स्थानीय कन्या मण्डल ने भी अपनी प्रस्तुति के उपरान्त आचार्यश्री से संकल्प की कामना की तो किशोरों को कराए गए संकल्प व नियम ही कन्याओं को प्रदान कर मंगल आशीष प्रदान किया। भगिनी विनता योगश्री, सुश्री निष्ठा, श्री मोहित दक, बालिका माहरी बोहरा, साची रायसोनी व उत्तम सिरोहिया ने आचार्यश्री के चरणों में अपने भाव सुमन अर्पित किए। पीकीं नाहर ने आचार्यश्री से तीस की तपस्या का प्रत्याख्यान किया तो श्री पूरनजी ने 28 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।

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