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विरार में आचार्य भगवंत आनंदऋषिजी  एवं परम पूज्य प्रभाकवरजी म.स की जन्मजयंती त्याग-तपस्या  के साथ मनाई गई।

विरार में आचार्य भगवंत आनंदऋषिजी एवं परम पूज्य प्रभाकवरजी म.स की जन्मजयंती त्याग-तपस्या के साथ मनाई गई।

संजय जैन/प्रवासी एकता

मुम्बई:-विरार चातुमार्स में विराजती प.पु.श्री डॉ.उदिताजी म.स ने अपने प्रवचन में फरमाया की महापुरुषों की जमजयंति मनाने से अनंत-अनंत कर्मो की निजरां होती है।महापुरुषों का जीवन विराट व्यक्तित्व मय होता है।गुरु एक शिल्पकार है।जो हमारे जीवन को प्रतिमा का रूप देते है।गुरु एक माझी है।जो हमारे जीवन को किनारे पर लगा देते है।गुरु एक मेघ है।जो तपतपाती धरती को शांत कर देते है।

प.पु. प्रभाकवरजी म.स. की जन्मजयंति निमित कई प्रकार की तपस्या हुई।और कन्या मंडल के द्वारा प्रभाकवरजी मस के जीवन पर एक सुंदर नाटिका प्रस्तुति की।साथ ही साथ अनेक प्रतियोगिता जप-तप के साथ महापुरुषों का जन्मदिन मनाया गया।

इस अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,जैन नवयुवक मंडल,जैन महिला मंडल,जैन बालीका मंडल आदि की सराहनीय उपस्थित रही।

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