Uncategorized

बचपन क्या था

 बचपन क्या था
विधा : कविता


याद आ रहे है हमे,
वो बचपन के दिन।
जिसमे न कोई चिंता,
और न ही कोई गम।
जब जैसा जहां मिला,
खा पीर हो गए मस्त।
न कोई जाति का झंझट,
न कोई ऊंच नीच का भेद।
सब से मिलकर रहते थे,
जैसे अपनो के बीच ।
पर जैसे-2 बड़े होते गये,
वो सब हमे सीखा दिया।
बचपन में अनभिज्ञ थे जिससे,
स्वार्थ के लिए जहर पिला दिया।
और मानो हमे बचपन का, 
सारा मतलब ही भूला दिया।
तभी तो लोग कहते है,
लौटकर बचपन आ नही सकता।
और बचपन की यादों को,
भूलाया जा नही सकता।।


जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close