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प्रशासनिक नाकामी की वजह से वसई का युवा मौलिक अधिकार से हुआ वंचित

प्रशासनिक नाकामी की वजह से वसई का युवा मौलिक अधिकार से हुआ वंचित

यूसुफ अली

वसई, पालघर जिला अंतर्गत वसई विधानसभा से एक इच्छुक उम्मीदवार स्वप्निल डिकुन्हा को हमारे प्रशासन की नाकामी के चलते मौलिक अधिकार से वंचित होना पड़ा जिसका स्वप्निल के दिल पर बहुत गहरा आघात लगा है दरअसल हर भारतीय को जिस प्रकार चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार है वोट डालकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार है ठीक वैसा ही किसी भी चुनाव में खुद किसी क्षेत्र से चुनाव लड़ने का अधिकार भी है ऐसे में स्वप्निल ने हाल में जारी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वसई विधानसभा से चुनाव लड़ने की इच्छा थी लेकिन इच्छा सिस्टम की खामी के चलते दब कर रह गई।
     हमने मामले की पड़ताल करने पूरी जानकारी निकालनी चाही तो और स्वप्निल डिकुन्हा से बात की तब डिकुन्हा ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि चूंकि में कई बरसो तक भारत मे स्थाई तौर पे नही रहता था इसलिए मेरा नाम वोटर लिस्ट में शामिल नही था अब पिछले लंबे समय से में स्थायी तौर पर वसई में ही रह रहा हु। और भारतीय नागरिक होने से वोटर लिस्ट में मेरा नाम होना मेरा मौलिक अधिकार है यह सोच कर मेने 3 अप्रेल 2019 को ऑनलाइन पद्धति से वोटर रजिस्ट्रेशन करवाने फार्म भरा करीब 4 महीना निकल जाने के बाद 3 अगस्त को मेरा ऑनलाइन फार्म निरस्त कर दिया गया जिसमें कारण दिखाया गया फ़ोटो बराबर नही है का वही यह भी दर्शाया गया कि मैने सुनवाई में हाजिर नही होते हुए अपने आवश्यक दस्तावेज पेश नही किये जबकि मुझे किसी तरह का कोई बुलावा वसई तहसील कार्यालय से आया ही नही खेर मेने फिर दुबारा 24 सितम्बर को ऑनलाइन आवेदन किया और तहसील कार्यालय में सम्पर्क किया तब मुझे कहा गया कि आपका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 7 दिनों के अंदर पूर्ण हो जाएगा आपका नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर दिया जाएगा फिर में लगातार हर एक दो दिन में ऑनलाइन फाइल नम्बर की मदद से अपने स्टेटस चेक करता रहा 4 दिन तक बी एल ओ तक कि नियुक्ति नही किये जाने के बाद फिर तहसील में सम्पर्क किये जाने और अपने विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताने पर तहसील कार्यालय से कहा गया कि जल्द ही आपका ऑनलाइन फार्म अप्रूव कर आपको एपिक नम्बर (वोटर रजिस्ट्रेशन नंबर) जारी कर दिया जाएगा फिर 24 तारीख से 2 अक्टुबर तक कुछ भी नही किये जाने के बाद एक ही दिन 2 तारीख को बीएलओ नियुक्त कर दिया जाता है वही उसी दिन में फील्ड वेरिफिकेशन भी कर दिया जाता है और अंत मे अप्रूवल भी कर दिया गया जिसके बाद ये कहा गया कि आज अप्रूवल हुआ है कल तक आपका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करते हुए एपिक नम्बर जारी हो जाएगा फिर 3 अक्टुबर को तहसील एवं प्रान्त अधिकारी से चुनाव नामांकन पत्र भरने की इच्छा जाहिर करते हुए एपिक नम्बर नही होने का सवाल किया तो प्रान्त अधिकारी ने कहा कि आज आप चाहो तो AB फार्म ले सकते हो फार्म को जमा करने की आखरी तारीख कल 4 अक्टुबर है तो आप फार्म को कल एपिक नम्बर जारी होने के बाद एपिक नम्बर का उल्लेख करके जमा कर सकते है ऐसे में हमने बकायदा पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए AB फार्म हांसिल किया और दूसरे दिन नामांकन के आखरी दिन फार्म को जमा करने से पूर्व निर्वाचन आयोग को एपिक नम्बर जारी करने का आग्रह किया तो निर्वाचन अधिकारी ने साफ मना करते हुए कहा कि आपका एपिक नम्बर 5 अक्टुबर के पहले जारी नही किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग के इस जवाब के बाद समय की कमी के चलते मेरे हाथ कुछ बचा नही और में अपना नामांकन पत्र भरने से वंचित रह गया तब मुझे निर्वाचन आयोग का अपने साथ पूर्वाग्रह की भावना से ग्रस्त होकर कार्य करने का आभास हुआ क्योंकि में पिछले लंबे समय से वसई विरार के प्रशासनिक अमले को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए न सिर्फ नचाया है बल्कि हमारे देश के कानून का पाठ भी पढ़ाया है जिसकी ही सजा के रूप में मुझे अपने मौलिक अधिकार से वंचित कर दिया गया।

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