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पक्ष निकम्मा विपक्ष निकम्मा वसई विरार किसका जिम्मा अबकी बार वोट नोटा पर ही करना

पक्ष निकम्मा विपक्ष निकम्मा वसई विरार किसका जिम्मा अबकी बार वोट नोटा पर ही करना

यूसुफ अली

वसई, वसई में इस चुनावी माहौल में पक्ष निकम्मा, विपक्ष निक्कमा, वसई विरार किसका जिम्मा यह एक स्लोगन बड़ा प्रचलित होते जा रहा है ज्ञात हो अब जब सिर्फ चंद दिनों बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव होने है ऐसे में वसई की जनता का एक तबका ऐसा है जो ऊपर लिखे स्लोगन को हर तरफ न सिर्फ फैला रहा है बल्कि बकायदा प्रचारित कर रहा है।   जैसा कि पिछले लंबे समय से सभी को मालूम है एक समाजसेवकों का समूह है जिनकी अपनी कुछ मांगे है और उन्ही मांगों को प्रशासन द्वारा पूरा नही किये जाने के चलते उक्त समाजसेवकों का समूह लगातार 3-4 महीने से आंदोलन पर बैठा है जिस आंदोलन के सूत्रधार है किशनदेव गुप्ता जो कि एक आरटीआई कार्यकर्ता है और पत्रकारिता भी कर चुके हैं ने अपने द्वारा आरटीआई कानून के तहत मांगी गई सूचना के तहत वसई सनसिटी सर्वधर्मी दफ़्नभूमि बांधकाम में हुए आर्थिक घोटाले को उजागर किये जाने के बाद प्रशासन पर घोटाले से सम्बंधित लोगो पर एफ आई आर दर्ज करवाने के लिए अनशन पर बैठे हैं किशनदेव गुप्ता को कई दिनों तक किसी प्रकार की प्रशासनिक सहायता न मिलने के चलते उनके मित्र क्षेत्र के एक वकील एडवोकेट अशोक वर्मा एवं उनकी एक टीम द्वारा आंदोलन में सहयोग करने और पुलिस विभाग को एफ आई आर दर्ज करने हेतु दबाव बनाने पिछले लंबे समय से प्रयत्न किए जाने के बाद भी अब तक किसी ठोस नतीजे पे नही पोहंचने के बाद किसी भी राजनैतिक पार्टी द्वारा भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज न उठाएं जाने से नाराज इस समूह ने चुनाव में किसी भी पार्टी की जीत नही हो उसके लिए चुनाव आयोग द्वारा चुनावी प्रक्रिया में चुनाव में खड़े उम्मीदवारों में से कोई भी उम्मीदवार पसन्द नही हो तो अंतिम बटन नोटा पर अपना मत देते हुए सभी उम्मीदवारों को नकारे जाने के विकल्प का इस्तेमाल किये जाने वाले बटन नोटा को अपना विकल्प मानकर न सिर्फ नोटा का प्रचार कर रहे बल्कि एक केम्पेन के रूप में प्रसार भी कर रहे हैं बतादे नोटा की ताकत पालघर जिला पिछले लोकसभा चुनाव में हाल ही में देख चुका है तब नोटा को तीसरा स्थान हांसिल हुआ था और वोट की गिनती की बात करे तो करीब 30 हजार के आस पास था जो काफी बड़ा कहा जा सकता है और इस 30 हजार में से भी अधिकतर नोटा को हांसिल हुआ वोट वसई क्षेत्र से था और उस समय तो ऐसा किसी ने प्रचार, प्रसार नही किया था ऐसे में इस विधानसभा चुनाव में नोटा वसई बड़ी अहमियत रखता है और कहि न कही नोटा चाहे अपने आप मे जीत न हांसिल कर सके लेकिन इतना तो जरूर है कि किसी न किसी का खेल नोटा बना भी सकता है और बनाने से ज्यादा बिगाड़ सकता है। ये तो वक्त के गर्भ में ही छिपा है कि खेल बनेगा या बिगड़ेगा लेकिन सभी राजनैतिक पार्टियों को नोटा को लेकर गम्भीर होना ही पड़ेगा।

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