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त्यौहारों को विराम

त्यौहारों को विराम

दो महीनों के लिए अब,

बंद हुए धार्मिक त्यौहार।

नये साल से फिर आएंगे,

हिंदुओ के त्यौहार।

तब तक मौज मस्ती, 

तुम सब कर लो।

हम भी करते है आराम।

क्योंकि प्रकृति ने दिया है, 

मौका हम सब को इसका।।

कितना धर्म कर्म किया है,

खुद करो अपना मूल्यांकन।

क्या खोया और क्या पाया है, 

खुद ही जान लो इन दिनों में।

सच्ची श्रध्दा और भक्ति का,

फल हर किसी को मिलता है।

क्योंकि भगवान भक्तों पर,

दया करुणा भाव रखते है।।

अहंकारियों का नाश सदा,

स्वंय मनुष्य ही करता है।

और दोष विपत्तियों का, 

वो भगवान पर मढ़ता है।

किया नही दान धर्म और

फिर भी चाहात पाने की रखता है।

अब तुम ही बतलाओ लोगो,

क्या बिना कर्म किये कुछ मिलता है?

इसलिए ज्ञानी कहते है,

श्रध्दा भाव रखो मन मे।

फल की चिंता छोड़कर, 

 गुण गान प्रभु का किया करो।।

जय जिनेन्द्र देव की

संजय जैन (मुम्बई

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