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क्या मुंह में राम बगल में छुरी वाले चरित्र की पार्टियां शिवसेना मनसे को वसई विरार की जनता चुनेगी अपना विकल्पएक तरफ मनपा आयुक्त को पत्र व्यवहार कर बढ़ते अवैध बांधकाम पर विरोध करने वाले दूसरी तरफ मनपा द्वारा तोड़क कार्यवाही के समय करते है हंगामा

क्या मुंह में राम बगल में छुरी वाले चरित्र की पार्टियां शिवसेना मनसे को वसई विरार की जनता चुनेगी अपना विकल्प
एक तरफ मनपा आयुक्त को पत्र व्यवहार कर बढ़ते अवैध बांधकाम पर विरोध करने वाले दूसरी तरफ मनपा द्वारा तोड़क कार्यवाही के समय करते है हंगामा

यूसुफ अली

वसई, महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में वसई वासियो के कई अपने मुद्दे है जिनको आधार बना कर हर पार्टी चुनावी समर में उतर रही है और लोगो के उन मुद्दों को ध्यान में रख कर आम जन की समस्याओं का हल निकालने का वादा कर रही है । वैसे तो कई मुद्दे है जो चुनाव में छाए हुए है ऐसे ही मुद्दों में एक मुद्दा है वसई विरार मनपा क्षेत्र में बढ़ता अवैध बांधकाम।           अवैध बांधकाम वाकई में अत्यंत ज्वलंतशील समस्या है क्योंकि अवैध बांधकाम जब भी कोई करवाता है तब उसके पास सम्पूर्ण दस्तावेज नही होते और नही पूरी प्रक्रिया का पालन कर आवश्यक अनुमति ली गई होती है ऐसे में जो भी बिल्डर या विकासक अपना काम करवाता है तो भविष्य में बांधकाम ध्वस्त किये जा सकने के डर से गुणवत्ता पर ध्यान नही देता और जितना कम दर पर काम करवाया जा सकता हो करवाता है जिसके चलते कई समस्याएं अपने आप पैदा हो जाती है कई कई जगहों पर बांधकाम तो हो जाता है लेकिन मूलभूत सुविधाएं नही पहुंच पाती सड़क, गटर आदि ऐसे में प्रशासन अगर कोई कार्यवाही नही करता है तो उस बांधकाम को बेचकर सम्बन्धित विकासक आराम से निकल जाता है खेर अवैध बांधकाम न कभी रुका है न कभी रुक पायेगा। हम बात कर रहे थे चुनावी मुद्दों की तो बतादे वसई विरार में पिछले 30 सालों से बहुजन विकास अघाड़ी सत्ता में है यह सभी जानते है और इन 30 सालों में वेध या अवैध बांधकाम बहुत बड़ी तादाद में हुए है जो किसी से छिपा नही है इसी अवैध बांधकाम को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टिया हमेशा बविआ पर निशाना साधती रहती है और चूंकि विपक्ष का काम ही सत्ता पक्ष के गलत कार्यो को उजागर करना है इस लिए विपक्ष द्वारा निशाना साधे जाने में कोई हर्ज नही है लेकिन वही विपक्ष यदि खुद वही गलत कार्य करती है जो सत्ता पार्टी कर रही है तो क्या विपक्ष का सत्ता पार्टी पर आरोप लगाना उचित कहा जा सकता है?   मामला है वसई अंतर्गत फादरवाडी क्षेत्र का जहा बजाज ऑटो के शोरूम के करीब उद्यान के पीछे चल रहा एक इमारत के दो मंजिला अवैध बांधकाम का जिसके निर्माण में जो कोई विकासक है उस के साथ पास ही के वार्ड की शिवसेना नगरसेविका का पति दिवाकर सिंग खुद साझेदार है यह कहना है खुद कार्यक्षेत्र पर कार्यरत कॉन्ट्रेक्टर (ठेकेदार) का हालांकि हमने फोन पर दिवाकर सिंग से बात करते हुए उक्त अवैध बांध काम में अपनी साझेदारी का सवाल किया तो दिवाकर सिंह ने मना कर दिया लेकिन तब भी ठेकेदार ने वही दोहराया खेर चूंकि उक्त इमारत पहले से विवादों में है खुद मनपा प्रभाग समिति के पूर्व सहाआयुक्त सुभाष जाधव ने इमारत के अवैध होने की पुष्टि करते हुए कार्यवाही न किये जाने के पीछे इमारत पर न्यायालय के स्थगन आदेश की दुहाई दी थी।   स्थगन आदेश होने के बाद भी निरन्तर चल रहे बांधकाम के बाद हाल ही में जब हमने वर्तमान प्रभारी सहायक आयुक्त प्रशांत चौधरी से मुलाकात कर जानकारी दी तब प्रशांत चौधरी ने सम्बन्धित विभाग के कर्मचारी को बुलाकर उक्त अवैध बांधकाम की रिपोर्ट तलब की और पूछा कि पहले जब शिकायत प्राप्त हुई थी तब कार्यवाही क्यों नही की गई ? सहायक आयुक्त को उस कर्मचारी ने जो जवाब दिया उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो । उक्त कर्मचारी का जवाब था कि सर पिछली बार जब शिकायत आई थी और हम तोड़क कार्यवाही करने पहुंचे तब वहां मनसे के नेता प्राविण भोईर ने आकर काफी हंगामा करते हुए बखेड़ा खड़ा कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि मनसे नेता जिसका जिक्र उस कर्मचारी ने किया था वर्तमान विधानसभा चुनाव में नालासोपारा से मनसे का अधिकृत प्रत्याशी है वही दूसरा जो साझेदार है दिवाकर सिंह वो शिवसेना का बड़ा पदाधिकारी है और वर्तमान शिवसेना नालासोपारा प्रत्याशी प्रदीप शर्मा का काफी करीबी है।
   इस मामले ने विपक्षी पार्टियों की नीयत को न सिर्फ उजागर कर दिया बल्कि विपक्षी पार्टियों में दो कट्टर विरोधी पार्टियों के आपसी सम्बन्ध को भी खोल दिया है ऐसे में क्या इन विपक्षी पार्टियों का सत्ता पार्टी के ऊपर आरोप लगाते हुए मतदाताओं से विकल्प के रूप में खुद इनको चुनकर लाने का आग्रह सही है? क्या वसई विरार की जनता मुंह मे राम बगल में छुरी वाले चरित्र की पार्टी को अपना वोट देगी? यही नही चुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व वसई विरार मनपा में अनेको मोरचे विभिन्न पक्षो द्वारा निकाले गए जिसमे सभी पक्षो ने मनपा आयुक्त को दिए ज्ञापन में अवैध बांधकाम पर अंकुश का आग्रह किया था । जिनमे उक्त पार्टियों के ज्ञापन भी शामिल थे।

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