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वसई विरार मनपा बनते जा रही है सर्कस का खेल अधिकारियों कर्मचारियों की अदलाबदली मनपा प्रशासन को करती जा रही है कठघरे में खड़ा

वसई विरार मनपा बनते जा रही है सर्कस का खेल अधिकारियों कर्मचारियों की अदलाबदली मनपा प्रशासन को करती जा रही है कठघरे में खड़ा

प्रवासी एकता /यूसुफ अली

वसई, वसई विरार मनपा में विवाद कोई नई बात नही है न चाहते हुए भी हर कोई मामला विवादास्पद हो ही जाता है ताज़ा मामला मनपा में अधिकारियों कर्मचारियों की नियुक्ति और अदलाबदली का है दरअसल कुछ महीनों पूर्व ही मनपा आयुक्त का कार्यभार संभालने वाले बी.जी.पवार ने पिछले सप्ताह में अपने स्टाफ में बड़े पैमाने पर अदला बदली करते हुए अधिकतर प्रभाग समितियों के प्रभारी सहायक आयुक्तों को अपने पद से हटाते हुए दूसरे विभागों में नियुक्त कर दिया है और उन प्रभाग समितियों में प्रभारी सहायक आयुक्त के तौर पर दूसरे अधिकारियों को नियुक्त कर दिया है विभाग अदलाबदली एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन किन नियमो के तहत किसी अधिकारी कर्मचारी को किसी पद पर नियुक्त किया जाता है यह सवाल काफी गहरा है? इस चीज को समझने से पहले आइए नजर डालते है वसई विरार के प्रशासनिक ढाँचे की सबसे पहले और सबसे वरिष्ठ अधिकारी आयुक्त है जिसकी नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है उसके बाद मनपा में 2 अतिरिक्त आयुक्तों के साथ एक उपायुक्त भी है इन चार वरिष्ठ अधिकारियों के मातहत मनपा में 9 प्रभाग समितिया है और दीगर भी कुछ प्रकल्प है जिनकी कमान एक सहायक आयुक्त के हाथों में होती है और उस सहायक आयुक्त के नीचे पूरा स्टाफ होता है जिसमे वरिष्ठ लिपिक भी सहायक आयुक्त के मातहत होता है आपको बतादे की सहायक आयुक्त का पद भी एक प्रतिष्ठित और सर्वोच्च पद में शुमार है और हो भी क्यों न? जब पूरे प्रभाग या प्रकल्प की जिम्मेदारी जो सहायक आयुक्त की होती है अब ट्विस्ट यह है कि दरअसल सहायक आयुक्त की नियुक्ति भी मंत्रालय द्वारा की जानी चाहिए पर चूंकि इन पदों को अबतक भरा नही जा सका है कोई पूर्णकालिक सहायक आयुक्त नही है ऐसे में मनपा प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर ही इन पदों पर प्रभारी सहायक आयुक्त की नियुक्ति करती है और इसी फार्मूले के तहत मनपा की तमाम प्रभाग समितियों में प्रभारी सहायक आयुक्तों को नियुक्त किया गया है मनपा का कार्य सुचारू रूप से हो सके इस हेतु यह आवश्यक भी है लेकिन इसमें भी कुछ तथ्य है जो बेहद संदिग्ध है सबसे पहले तो यह सवाल आता है कि किस व्यक्ति को इतने बड़े पद का प्रभार दिया जाए? तो जहा तक हमे जानकारी है ऐसे किसी भी पद का प्रभार सिर्फ उसी व्यक्ति को दिया जा सकता है जो उस पद के समकक्ष हो लेकिन वसई विरार मनपा में जितने भी प्रभारी सहायक आयुक्त है सभी के सभी वरिष्ठ लिपिक के पद की योग्यता रखते है ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या किसी लिपिक को बगेर प्रमोशन सहायक आयुक्त का कार्यभार दिया जा सकता है? और इतना ही नही जिनको सहायक आयुक्त का प्रभार दिया गया है उन्ही अधिकारी को कुछ समयावधि में ही फिर से वरिष्ठ लिपिक बना दिया जाता है मतलब कल तक जो अधिकारी पद में बड़ा था और उसके नीचे के अधिकारी को दिशानिर्देश देता था आज वही अधिकारी फिर से लिपिक बनने के बाद उसी पूर्व लिपिक जिसको अब सहायक आयुक्त का प्रभार सौंपा गया है उसके मातहत कार्य करे। इस मामले में एक बात और ये भी बताते चले जितने भी प्रभारी सहायक आयुक्त पिछले समय से मनपा की विभिन्न प्रभाग समितियों में नियुक्त थे पर कई गम्भीर आरोप तक लग चुके हैं एक दो के ऊपर तो बकायदा अपनी कार्याअवधि में सही से कार्य न किये जाने के चलते पुलिस में एफ आई आर तक कि जा चुकी है इसके इतर एक और अधिकारी का तबादला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है दरअसल मनपा नगर रचना विभाग के प्रमुख उपसंचालक संजय जगताप को वसई विरार मनपा से तत्काल बदली करने के मंत्रालयीन आदेश के बाद क्षेत्र में अलग अलग लोगो की अलग अलग प्रतिक्रियाए आ रही है इसी क्रम में भाजपा नालासोपारा महासचिव मनोज बारोट ने तो बकायदा आयुक्त को पत्र लिख कर जब तक किसी और अधिकारी की उपसंचालक पद पर नियुक्ति न कि जाए संजय जगताप को नही हटाये जाने का आग्रह किया है जिसमे मनोज बारोट का तर्क है कि यदि मनपा संजय जगताप को हटा देती है ऐसे में उपसंचालक का रिक्त पद भरने उनके जूनियर वाई एस रेड्डी को उपसंचालक का कार्यभार सौंप सकती है जो कभी गवारा नही होगा क्यों कि रेड्डी पर पहले से ही भ्रस्टाचार का संगीन आरोप लग चुका है जिसके चलते रेड्डी 2 साल का निलंबन भी झेल चुके हैं यदि रेड्डी वरिष्ठतम पद पर बैठ गए तो उनके खिलाफ चल रहे मामले को प्रभावित कर सकते है मनोज बारोट ने पत्र में उनकी मांग नही माने जाने की सूरत में आंदोलन तक करने की चेतावनी दी है खेर मनोज बारोट का आग्रह अपनी जगह है और चूंकि मनोज बारोट एक पार्टी से सम्बंधित है तो उन्हें भी मुद्दे को भुनाने और मीडिया का ध्यान खिंचे जाने का खयाल जरूर आया होगा और रही बात राजनीति की तो यह भी बतादे की भाजपा की ही एक नालासोपारा नेत्री और एडवोकेट नेहा दुबे ने पिछले कुछ समय पूर्व बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी करके संजय जगताप पर संगीन आरोप लगाते हुए उन हटाये जाने की वकालत की थी इस पूरे मामले को देखने से ऐसा प्रतीत होता है मानो मनपा प्रशासन न होकर कोई सर्कस का मैदान है जहाँ हर कोई रिंग मास्टर बनने की फिराक में है।

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