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मोहब्बत कैसे शुरू होती है

प्रवासी एकता/संजय जैन(मुम्बई)

मोहब्बत कैसे शुरू होती है

मोहब्बत कैसे हो गई,
हमें पता ही नही चला।
आंखों का आंखों से मिलना, ही इसका कारण है।
क्योंकि दिलों की बात दिलवाले ही जानते है।
प्यार को प्यार करने वाले ही पहचानते है।
इसलिए आंखों ही आंखों में मोहब्बत हो जाती है।

दो जवां दिलो की धड़कनों को दूर से समझते है।
इसलिए तो आंखों का आंखों से रोज मिलना होता है।
और इसक दूसरे को देख देखकर मुस्काना होता है।
यही से तो दो दिलो में मोहब्बत का उदय होता है ।
साथ ही दोनों के दिलो में कुछ कुछ होने लगता है।

रोज रोज सिलसिला मोहब्बत का यूहीं चलता है।
मन बैचेन और दिल बात करने को व्याकुल होता है।
कैसे भी करके दोनों एक दूसरे के बाज़ू से निकलते है।
और हिम्मत करके दोनों धीरे से कुछ कहते है।
और बातो और मिलने का सिलसिला शुरू होता है।।

हर उम्र के लोगों पर मोहब्बत का रंग चढ़ाता है।
कुछ लोग मोहब्बत करके निखार जाते है।
जैसे उड़ चुनरिया श्याम की मीरा प्यार में रंग गई।
और वो हरि हरि गुन गुनाने के मीरा दीवानी हो गई ।
और सारे जग में प्यार मोहब्बत को अमर कर गई।।

संजय जैन(मुम्बई)

जय जिनेन्द्र देव की

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