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बहुजन विकास अघाड़ी को नही मिल पा रहा डूबती नैय्या पार लगाने वाला तारणहार, महापौर रूपेश जाधव के इस्तीफे को सप्ताह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी बरकरार है संशय ताज़ा हालात में सबसे बड़ा सवाल है कौन बनेगा महापौर?

बहुजन विकास अघाड़ी को नही मिल पा रहा डूबती नैय्या पार लगाने वाला तारणहार महापौर

रूपेश जाधव के इस्तीफे को सप्ताह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी बरकरार है संशय ताज़ा हालात में सबसे बड़ा सवाल है कौन बनेगा महापौर?

प्रवासी एकता / यूसुफ अली

वसई:- वसई विरार मनपा महापौर पद से जब से निर्वतमान महापौर रूपेश जाधव ने इस्तीफा दिया है तब से वसई विरार की राजनीति का पूरा का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है। क्षेत्र की सबसे दमदार पार्टी बहुजन विकास अघाड़ी जो कि पिछले 2 दशकों से भी ज्यादा समय से क्षेत्र पर राज कर रही है की हालत अचानक ही नई जन्मी पार्टी की तरह हो गई है पार्टी बिखर सी गई है कल तक जो पार्टी अपने आलाकमान के एक फरमान पर एकजुट हो जाती थी आज अलग थलग दिखाई पड़ रही है जिसका सीधा उदाहरण नए महापौर का अभी तक न चुना जाना है क्षेत्र में अफवाहे भी काफी परवान पे है ये तो सभी को विदित है ही कि आज तक पार्टी में जो भी कुछ बड़े निर्णय लिए जाते रहे हैं वो पार्टी आलाकमान में पार्टी के अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर द्वारा ही लिए जाते है लेकिन अभी रूपेश जाधव ने इतना बड़ा फैसला खुद ही लेकर न सिर्फ सभी को चौकाया बल्कि यह भी जाहिर कर दिया कि अब आलाकमान की मर्जी हो या न हो जिसे जो करना है अपनी मर्जी कर सकता है हालांकि इस्तीफे के बाद डेमेज कंट्रोल करने के लिहाज से रूपेश जाधव ने मीडिया में बयान दिया कि मैं तो कई पदों पर पहले ही रह चुका हूं और दूसरे वरिष्ठ नगरसेवको में से किसी और को मौका मिल सके में पद त्याग रहा हु रूपेश जाधव के इसी बयान ने डेमेज कंट्रोल तो दूर उल्टा पार्टी की फजीहत जरूर जाहिर कर दी रूपेश जाधव के इस बयान ने विपक्षियों को निशाना साधने का एक सटीक मौका दे दिया विपक्षी पार्टियों में से हालांकि अभी तक किसी ने आधिकारिक रूप से तो कुछ बयान नही दिया लेकिन दबी जबान में सभी बविआ पर सिर्फ कुर्सी की राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं जो कुछ हद तक सही भी है रूपेश जाधव ने अपने इस्तीफे के बाद के बयान में क्षेत्र की जनता का तो कोई जिक्र नही किया उल्टा दूसरे नगर सेवको को मौका दिया जाना कहा जो वास्तव में बविआ के कुर्सी प्यार को दर्शाता है अब सिर्फ चन्द महीने ही बचे हैं मनपा चुनाव में ऐसे में क्या गद्दी ही मायने रखती है? यह विवाद पैदा हो गया और वैसे भी चाहे कोई कहे या न कहे लोकतांत्रिक प्रकिया के मद्देनजर एक के द्वारा इस्तीफा दिया जाने के बाद किसी दूसरे को तो उस कुर्सी (पद) पे विराजमान होना ही पड़ता है इससे तो अच्छा होता रूपेश जाधव ये ही बहाना बना लेते की पिछले साल की बाढ़ के बाद भी इस साल फिर से बरसात में क्षेत्र में अत्यधिक जलजमाव को नैतिक जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे रहा हु इससे कम से कम जनता में एक अच्छा सन्देश जरूर जाता और रही बात इस्तीफे के फैसले जिसको ऐसा दर्शाया गया कि आलाकमान की सहमति से दिया गया है तो उसमें सन्देह तभी पैदा हो गया जब इस्तीफा पार्टी मुख्यालय पर नही दिया गया और नही पार्टी प्रमुख ने ही इस्तीफे पर कुछ बयान दिया अगर पार्टी में सब सही चल रहा होता तो इस्तीफे के तुरंत बाद ही नए महापौर के नाम का भी ऐलान हो गया होता जो अब तक एक सप्ताह बीत जाने पर भी नही हो पाया है।

इन सभी बातों के इतर वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल ये है कि कौन चुना जाएगा वसई विरार मनपा का नया महापौर ? एक प्रसिद्ध टेलीविजन सीरीज कौन बनेगा करोड़पति की तर्ज पर नया सवाल है कौन बनेगा महापौर ? हालांकि कुछ नाम जरूर सामने आ रहे हैं जिनमे से उमेश नाइक, भरत मकवाना, आदि ये दोनों नाम ज्यादा चर्चा में है जिसमे भी सूत्रों की माने तो उमेश नाइक भी इतने कम समय के लिए महापौर की कुर्सी पे बैठने के लिए अभी राजी नही है क्योंकि आगामी जून जुलाई में मनपा के चुनाव होने है जिसके पहले हाल फिलहाल विधानसभा चुनाव है ऐसे में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता लग जायेगी जो करीब डेढ़ से 2 महीने की अवधि तक रह सकती है फिर उसके बाद मुश्किल से 4 या 5 महीने का समय मिलेगा और मनपा चुनाव की घोषणा होते ही एक बार फिर आचार संहिता लागू हो जाएगी ऐसे में नए महापौर के पास मुश्किल से 6 से 7 महीने ही बचेंगे ऐसे में यदि पार्टी का प्रदर्शन खराब होता है तो उसका ठीकरा भी महापौर के ऊपर फूटने का पूरा डर बना रहता है जिससे महापौर की हालत उस कहावत के जैसी हो जाएगी खाया पिया कुछ नही गिलास तोड़ा बारा आना।

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