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विवेक चेतना को जागृत करने का करे प्रयास– आचार्य महाश्रमण

विवेक चेतना को जागृत करने का करे प्रयास– आचार्य महाश्रमण

टीपीएफ की नेशनल कॉरपोरेट कॉन्फ्रेंस आयोजित
चार आचार्यों के विशेष प्रसंग से जुड़ी है भाद्रपद शुक्ला द्वादशी

रवि जैन प्रवासी एकता चीफ ब्यूरो 9987630799

10-09-2019 मंगलवार , कुम्बलगोडु, कर्नाटक।

हमारे जीवन मे विवेक चेतना का महत्वपूर्ण स्थान होता है। व्यक्ति को समस्त कार्य विवेकपूर्ण करने चाहिए क्योंकि विवेक से किया गया कार्य ही सफल होता है। अविवेक से कार्य करने पर उसके असफल होने की संभावना बढ़ जाती है। उपरोक्त उद्गार तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने धर्मसभा मे व्यक्त किये।

आचार्य महाश्रमण जी ने आगे कहा – किसी भी कार्य को करने से पहले अपने विवेक बल, बुद्धि बल, शारीरिक बल, क्षेत्र, काल आदि सभी विषयों को ध्यान में रखकर योजना बनाई जानी चाहिए। व्यक्ति को अपनी योग्यता देखकर योजना बनानी चाहिए। अगर बिना योग्यता देखें बिना विवेक से कोई योजना बना ली जाए तो उस योजना के सफल होने में संदेह रहता है। आज का दिन विशेष दिन है क्योंकि यह दिन तेरापंथ धर्मसंघ के चार-चार आचार्यों से जुड़ा हुआ दिन है। आज ही के दिन आचार्य भिक्षु ने सिरियारी में अपनी शारीरिक अवस्था को देखकर विवेक बल से अनशन स्वीकार किया था। आचार्य भिक्षु ने देखा कि अब शरीर की परिस्थितियां अनुकूल नहीं लग रही है तो उन्होंने अनशन को स्वीकार कर शरीर का सार निकाला और आत्मा का कल्याण किया।

आज ही के दिन तेरापंथ धर्म संघ के सातवें आचार्य आचार्य डालगणी का लाडनूं में विक्रम संवत 1966 में महाप्रयाण हुआ था। आचार्य डालगणी अपने 12 वर्षीय आचार्य काल में धर्म संघ को अनेक क्षेत्रों में संवारा और अपने विवेक से संघ की नेतृत्व व्यवस्था एक चिट्ठी में लिखकर कर दी थी। आचार्य डालगणी कच्छी पूज आचार्य के रूप में भी जाने जाते थे। आज ही के दिन आचार्य श्री महाप्रज्ञजी ने तेरापंथ धर्मसंघ के लिए गंगाशहर में युवाचार्य की घोषणा करते हुए मुनि मुदित को युवाचार्य महाश्रमण के रूप में चद्दर ओढाई। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने इस निर्णय के साथ आचार्य तुलसी के लिखे हुए शब्दों को भी कृतार्थ कर दिया। उन्होंने अपने गुरु निर्देश और अपने दायित्व दोनों को पूरा कर जो एक आचार्य के ऊपर धर्मसंघ का बहुत बड़ा कर्जा होता है उसे पूर्ण कर दिया। आचार्यश्री ने फरमाते हुए कहा कि उन्हें युवाचार्य के रूप में 13 वर्ष और महाश्रमण के रूप में 8 वर्ष आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के निर्देशन में संघीय कार्य करने का अवसर मिला जो उनके जीवन की विशिष्ट उपलब्धि है।

कार्यक्रम में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की चौथी नेशनल कॉरपोरेट कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी हुआ। इस अवसर पर संयोजक श्री अशोक सुराणा ने अपने भाव रखे।

कार्यक्रम में आचार्य प्रवर ने डालगणी की जन्मस्थली उज्जैन में अपना 2021 प्रवास को फरमाते हुए तेरापंथ धर्मसंघ के एक एकमात्र समण सिद्धप्रज्ञ को उज्जैन में मुनि दीक्षा देने की घोषणा की !

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