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नाकोड़ा धाम बना मुनिवृन्दो का संगम स्थल हो रही है ज्ञान की अमृत वर्षा

नाकोड़ा धाम बना मुनिवृन्दो का संगम स्थल हो रही है ज्ञान की अमृत वर्षा सबसे रखे सद्द व्यवहार: आचार्य
पुणे

रवि जैन प्रवासी एकता चीफ ब्यूरो

विभिन्न क्षेत्रों में अपने-अपने चातुर्मास संपन्न कर इन दिनों अधिकांश मुनिवृंद एवं साध्वियां नाकोड़ा धाम पहुंच रहे हैं ।बुधवार को जैन समाज के अलग-अलग मान्यता वाले साधु संतों का आचार्य चंद्रानंद सागर सुरीश्वर धाम में लोगों ने गाजे-बाजे के साथ अगवानी की ।साधु-संतों एवं साध्वियों का एक स्थान पर एकत्रीकरण किसी त्रिवेणी संगम का सा लगा।

नाकोड़ा धाम के प्रमोद सूर्या के अनुसार वर्षावास पश्चात सभी गुरु भगवंतो का विहार चल रहा है ,तथा इन दिनों यहां राष्ट्रसंत आचार्य चंद्रानंद सागर सुरीश्वर महाराज, साध्वी विश्व वंदना, डॉक्टर परमेष्ठी वंदना ,साध्वी कल्पिता श्री जी, चारुता श्रीजी, मुनि हरिश्चंद्र सागर, साध्वी आशिता श्री जी, एवं हृषिता श्रीजी का भी यहां नाकोड़ा धाम में प्रवास चल रहा है ।इन साधु साध्वियो के अलावा अनुव्रत जीवन विज्ञान अकादमी के राष्ट्रीय संयोजक प्यारचंद मेहता भी आए हुए हैं जो संतों की धर्म चर्चा में शामिल होते हैं।

विश्वसंत का काफिला भी मुंबई की और

पुणे महानगर में अपना वर्षावास संपन्न कर विश्वसंत की उपाधि प्राप्त कर चुके आचार्य शिवमुनि युवाचार्य महेंद्र ऋषि महाराज ,प्रमुख मंत्री शिरीष मुनि, सह मंत्री शुभम मुनि, सहित अट्ठारह मुनियो के काफिले सहित बुधवार को युवाचार्य के पैतृक गांव चाकण पहुंचे ।जहां वे गुरुवार को महेंद्र भवन में नवनिर्मित लाखों की लागत से बनी भोजनशाला का लोकार्पण करेंगे ।आचार्य का यह काफिला 22 नवंबर को तलेगांव ,23 को तालेगांव दाभाड़े, 24 को लोनावाला, पश्चात 28 को पनवेल ,30 को वासी पश्चात 4नवम्बर से दो दिवसीय मेवाड़ भवन गोरेगांव मुंबई में प्रवास करेंगे जहां आत्मा ध्यान की साधना का शिविर लगेगा।

रखें सद व्यवहार

नाकोड़ा धाम में उपस्थित श्रद्धालुओं को सीख देते हुए आचार्य चंद्रानंद सागर सुरीश्वर महाराज ने कहा कि जीवन ऐसा जिए कि आप जहां रहे सब आपको प्यार करें ,जहां से आप जाए पीछे सब आपको याद करें और आप जहां जा रहे हैं वहां पर सब आपका इंतजार करें। उन्होंने कहा कि तलवार की कीमत होती है धार से और अच्छे इंसान की कीमत होती है सदव्यवहार से ।याद रखें सुंदर चेहरा दो मिनट याद रहता है पर सुंदर व्यवहार हमें जीवन भर याद रहता है ।हम हाथ उठाकर दस लोगों को भी जीत नहीं सकते पर हाथ जोड़कर लाखों लोगों का दिल जीत सकते हैं ।उन्होंने व्यंग करते हुए कहा कि पुरुष लोग शादी से पहले जैसा व्यवहार करते हैं अगर वैसा ही व्यवहार शादी के बाद भी करें तो तलाक की कभी नौबत नहींआएगी।

जुबान से होती है आदमी की पहचान

साध्वी विश्ववंदना ने कहा कि मधुर बोलेंगे तो लोगों के दिलों में उतरेंगे और कड़वा बोलेंगे तो लोगों के दिलों से उतर जाएंगे ।शब्दों में बड़ी जान होती है इन्हीं से आरती अरदास और अजान होती है। यह समंदर के मोती हैं जिनसे अच्छे आदमी की पहचान होती है ,संसार में जितने भी झगड़े हुए हैं उनमें आधे से ज्यादा झगड़े को वचन के कारण हुए हैं जो लोग मधुर जुबान का उपयोग करते हैं वह दुश्मन को भी दोस्त बनाने में सफल हो जाते हैं। साध्वी डॉ परमेष्ठी वंदना ने कहा कि हमारी भाषा में तीन गुण होने चाहिए शिष्ट, मिस्ट और ईस्ट अर्थात शिष्टाचार युक्त मीठी और प्रिय अगर हम भाषा में यह तीन गुण ले आए तो हम लोगों के दिलों में सदा राज करेंगे ।राम की वाणी में यह गुण थे ,इसलिए उन्होंने दुश्मन के भाई को अपना मित्र बना लिया और रावण ने कड़वा बोल कर अपने सगे भाई को भी खो दिया । हम केवल मीठा खाएंगे तो बीमार पड़ेंगे ,पर मीठा बोलना शुरू करेंगे तो सदाबहार स्वस्थ और कुशल जीवन में सफल हो जाएंगे।

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