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धर्मयोद्धा थे आचार्य भिक्षु– आचार्य महाश्रमण

धर्मयोद्धा थे आचार्य भिक्षु– आचार्य महाश्रमण

रवि जैन प्रवासी एकता चीफ ब्यूरो 9987630799

आचार्य भिक्षु का 217वां चरमोत्सव आयोजित
साधु-साध्वीवृन्द द्वारा सामुहिक गीत की प्रस्तुति स्थानीय विधायक ने दर्शन कर पाया आशीष

11-09-2019 बुधवार , कुम्बलगोडु, कर्नाटक।

तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रतिनिधि, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ के प्रथमाचार्य श्री भिक्षु का 217वां चरमोत्सव मनाया गया। आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना केंद्र के विशाल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को उद्बोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमणजी ने कहा – आचार्य भिक्षु धर्मयोद्धा थे। सत्य, आत्मबल, स्पष्टवादिता उनके हथियार थे।

आचार्य भिक्षु के सामने लक्ष्य महान था और उस तक पहुंचने के लिए उन्होंने अनेक कष्ट सहे। उनके जीवन से हमे प्रेरणा मिलती है कि अगर कोई आदमी महान लक्ष्य की ओर बढ़े तो उस तक पहुंचने के लिए रास्ते में आने वाली सघन समस्याओं को सहन करके उनका परिष्कार कर आगे बढ़ना पड़ता है। आचार्य भिक्षु विशिष्ट व्यक्तित्व के धनी थे। तत्पश्चात आचार्यवर ने स्वरचित गीत का संगान किया एवं “ॐ भिक्षु” के जप द्वारा समस्त वातावरण को भिक्षुमय बना दिया।

गुरुदेव से पूर्व ‘असाधारण’ साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा जी ने जन समुदाय को प्रेरित करते हुए कहा कि आचार्य भिक्षु महान क्रांतिकारी थे। अपने समय में वे प्रतिस्त्रोत में चले और मार्ग में आने वाली हर बाधा को साहस व पराक्रम से परास्त किया। उनकी आचारनिष्ठा विलक्षण थी। विरोधी भी उनका लोहा मनाते थे। मुख्यमुनि श्री महावीर कुमार जी, मुख्यनियोजिकाजी साध्वी विश्रुतविभा जी ने भी वक्तव्य प्रदान किया।

इस अवसर पर मुनिवृन्द एवं साध्वीवृन्द ने गीतों का सामुहिक संगान किया। तेयुप बेंगलुरु के सदस्यों ने गीत की प्रस्तुति दी। आज स्वामी जी की बड़ी तेरस के अवसर पर सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने उपवास किये एवं बड़ी तपस्याओं का प्रत्याख्यान किया। मंच का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।

कार्यक्रम से पूर्व चिकपेट, बेंगलुरु के विधायक उदय जी गरडाचार्य ने शांतिदूत के दर्शन किये और आशीर्वाद प्राप्त किया।

यूट्यूब पर ऑनलाइन देखने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करे

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