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इंसान का व्यवहार ही उसके चरित्र का आईना : विश्ववंदनाजी

इंसान का व्यवहार ही उसके चरित्र का आईना : विश्ववंदना

“दुनिया का कोई ज्योतिषी हमारे नसीब को नहीं बदल सकता लेकिन हमारी सोच स्वभाव और व्यवहार अपना नसीब जरूर बदल सकता है: परमेष्ठी वंदना

संजय जैन

वसई:-मनुष्य का व्यवहार ही जीवन और चरित्र का परिचायक हुआ करता है ।हमारा स्वभाव ,व्यवहार के रूप में प्रकट होता है ,व्यवहार ही चरित्र, शालीनता ,और कुलीनता का निर्माण करता है ।महान लोग शत्रु के साथ भी महान व्यवहार करते हैं और ओछे लोग मित्र के साथ भी ओछा व्यवहार करते हैं।
हमारी वाणी ,व्यवहार, ही हमारे जीवन का परिचायक होता है। इसलिए उसे सदा शिष्ट रखें ।यह विचार विदुषी साध्वी विश्ववंदना ने वसई स्थित स्थानक सभागार में श्रद्धालुओं के बीच व्यक्त किए।
साध्वी ने कहा प्रत्येक जन को अपने चरित्र निर्माण के लिए अपने आप को शिष्ट बनाये।चेहरे को रंग देना कुदरत का काम है पर उसे ढंग देना हमारा अपना काम है ।जिस व्यक्ति का व्यवहार और वाणी उत्तम है वह आज नहीं तो कल अपने भाग्य को जगाने में समर्थ हो जाएगा। व्यक्ति का व्यवहार और स्वभाव ही जीवन को ऊंचा उठाते हैं और नीचे गिराते हैं। राम और रावण में व्यवहार और स्वभाव का ही फर्क था जिसके चलते राम तब से लेकर अब तक पूजे जा रहे हैं, और रावण तब से अब तक फूंका जा रहा है।

बड़प्पन रखें
ज्ञानवंचना परमेष्ठी वंदना ने श्रद्धालुओं से कहा कि कानों में कीलें ठोंकी जाए ,पर साधनासील व्यक्ति शांत रहे और कोई सलीब पर लटकाए तब भी उनके प्रति प्रेम और करुणा के भाव हो – महावीर और जीसस के इस व्यवहार ने सदा के लिए उनको भगवान बना दिया ।वक्त आने पर हमारे द्वारा दिखाया गया दो मिनट का बड़प्पन हमारी प्रतिष्ठा को दुगना कर देता है।
साध्वी ने कहा आज बालों या गालों को संवारने कि नहीं, जीवन जीने की शैली को संवारने की जरूरत है और इसके लिए व्यवहार और विचार दोनों में तालमेल रखिए ।उन्होंने कहा कि जितना अच्छा हम बाहर से अपने आपको दिखाते हैं, उससे दुगना अपने आप को भीतर से अच्छा बनाइए। उन्होंने कहा कि ज्यादा धन और गोरा रंग दो दिन अच्छा लगता है, पर अच्छा व्यवहार जिंदगी भर अच्छा लगता है। जो झुक कर रहता है वह रस से भरा आम होता है और जो अकड़ कर रहता है वह कच्ची कैरी होता है।

व्याख्यान के दौरान वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ वसई गांव के अध्यक्ष मांगीलाल बोल्या, उपाध्यक्ष नेमीचंद कोठारी ,मंत्री बलवंत बाफना ,कोषाध्यक्ष राजेश ठाकुरगोता ने महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के अलावा गुजरात एवं राजस्थान से आए जैन संघ के पदाधिकारियों को शाल भेंट कर उनका बहू मान किया ।

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