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आचरण को शुद्ध करें वह धर्म= मुनिज्ञानेंद्र कुमार

आचरण को शुद्ध करें वह धर्म

मुनिज्ञानेंद्र कुमार

प्रवासी एकता/रवि जैन

चेन्नई के नॉर्थटाउन में आज जैन धर्म की दो परंपराओं का आध्यात्मिक मिलन हुआ। मूर्ति पूजक समाज के क्रांतिकारी प्रवचन कार आचार्य विमल सागर जी महाराज और तेरापंथ धर्म संघ के तपस्वी संत मुनि श्री ज्ञानेंद्र कुमार जी का सामूहिक प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया । मुनि ज्ञानेन्द्र कुमार जी ने कहा कि मन को शुद्ध करना ही धर्म का मूल उद्देश्य है।धर्म ना क्रिया कांड में है धर्म न प्रवचन में है धर्म न बाहरी किसी से जुड़ा हुआ है अपितु धर्म का संबंध ह्रदय की शुद्धता के साथ है। जहां ह्रदय की शुद्धता है । वही धर्म का निवास स्थान होता है। आज जैन समाज को अपने धार्मिक पक्ष के साथ-साथ सामाजिक पक्ष को भी मजबूत करने के लिए एक सुव्यवस्थित व्यवस्था का गठन करना चाहिए जिसमें सादगी हो संस्कार हो और सर्वजन हितकारी सर्व कल्याणकारी नीति हो। इस अवसर पर मुनि विमलेश कुमार विनीत कुमार भी उपस्थित थे।

आचार्य विमल सागर जी महाराज ने बहुत ही कड़वे प्रवचन के द्वारा लोगों को आगाह करते हुए कहा कि अगर जैन समाज आज नहीं जागृत हुआ आज अगर उसकी संख्या इसी तरह घटती रही और संख्या कैसे बड़े इस पर अगर गौर नहीं किया तो आने वाले समय में जैन समाज खत्म हो जाएगा ।आज मंदिर भवन इनको बचाने कि नहीं आज जैन समाज की संख्या को बढ़ाने की चिंता करनी चाहिए। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों की उपस्थिति थी

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